गेहूं की फसल कटने के बाद खुशी से भरे किसानों के लिए एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। जिस नए भूसे को आप पशुओं के लिए अमृत समझ रहे हैं, वही चारा उनके पेट में जहर घोल सकता है।
नया भूसा पशुओं के लिए जानलेवा, देवरिया में अधिकारी ने पशुपालकों को किया सावधान
देवरिया। गर्मी के मौसम में जब किसान गेहूं की कटाई और भूसा जमा करने में जुटे हैं, तब पशुपालन विभाग ने एक बड़ी चिंता जाहिर की है। नया भूसा पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। यह खुलासा करते हुए विकास खंड बैतालपुर के पशुधन प्रसार अधिकारी निशाकान्त तिवारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण के दौरान पशुपालकों को गंभीर सलाह दी। वे संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत उसरा बाजार, तिवई, कोईलगड़हा एवं जंगल ईमिलिहां गांव पहुंचे थे, जहां उन्होंने लोगों से तत्काल नया भूसा खिलाने से पहले सावधानी बरतने का आग्रह किया।
क्यों खतरनाक हो जाता है ताजा भूसा?
पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार नए भूसे में फाइबर और लिग्निन की मात्रा काफी अधिक होती है। यह तत्व इतने कठोर होते हैं कि पशुओं का पाचन तंत्र इसे आसानी से तोड़ नहीं पाता। जब यह पेट में जाकर जमता है तो आंतें ब्लॉक हो जाती हैं। नतीजा सामने आता है गोबर बंद (कब्ज), असहनीय गैस बनना और पेट फूलने की बीमारी जिसे आम भाषा में अफरा कहते हैं। अगर समय रहते इलाज न मिले तो यह स्थिति पशु की जान तक ले सकती है।
कीटनाशक का जहर भी है बड़ा कारण
अधिकारी निशाकान्त तिवारी ने किसानों को आगाह किया कि फसलों पर छिड़के गए पेस्टिसाइड्स (कीटनाशक) के अवशेष सीधे भूसे पर चिपके रहते हैं। अगर पशु इस भूसे को बिना धोए या उपचार किए खा लेते हैं तो उनके शरीर में रासायनिक जहर फैल सकता है। इसके चलते दस्त की समस्या, लिवर पर असर और दूध उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।
पशु बचाने के लिए अपनाएं ये 5 आसान नियम
पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है। अगर थोड़ी सी सावधानी बरती जाए तो नया भूसा भी पौष्टिक आहार बन सकता है। अधिकारी ने इसके लिए कुछ जरूरी उपाय सुझाए हैं:
- भिगोना न भूलें: नए भूसे को खिलाने से पहले कम से कम 2 से 3 घंटे तक साफ पानी में जरूर भिगोकर रखें। इससे वह नरम हो जाएगा और पाचन आसान होगा।
- हरा चारा मिलाना है जरूरी: अकेले सूखा भूसा कभी न दें। इसे हमेशा बराबर मात्रा में हरे चारे के साथ मिलाकर ही कुंडे में डालें।
- मीठा सोडा और नमक का प्रयोग: पेट को स्वस्थ रखने और गैस की समस्या से बचाने के लिए सप्ताह में एक या दो बार चारे में चुटकी भर मीठा सोडा और सेंधा नमक जरूर मिलाएं।
- पुराने और नए का मिश्रण: यदि संभव हो तो नए भूसे को पिछले साल के बचे पुराने भूसे में मिलाकर धीरे-धीरे पशु के आहार में शामिल करें। अचानक से आहार बदलने से पाचन बिगड़ता है।
- मिनरल मिक्सचर है रामबाण: पशुओं के संपूर्ण स्वास्थ्य और दूध में वसा की मात्रा बनाए रखने के लिए चारे में मिनरल मिक्सचर का उपयोग अनिवार्य रूप से करें।
विभाग की इस चेतावनी के बाद गांवों में पशुपालक सतर्क हो गए हैं। ग्राम उसरा बाजार के किसान रामअवध ने बताया कि पिछले साल उनकी एक गाय नए भूसे की वजह से बीमार पड़ गई थी, तब कारण समझ नहीं आया था। अब वे पूरी सावधानी बरत रहे हैं।
