कानपुर देहात में जीजा-साली के प्रेम का दर्दनाक अंत, जंगल में मिले क्षत-विक्षत शव; पुलिस की लापरवाही पर SO सस्पेंड

कानपुर देहात (उत्तर प्रदेश), 04 अक्टूबर: प्रेम की राह में समाज की दीवारें टूट गईं, लेकिन अंत इतना दुखद होगा, किसी ने सोचा नहीं। हफ्ते भर की तलाश के बाद जंगल में पड़े शवों ने परिवारों को तोड़ दिया, जहां मां-बाप की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे।

कानपुर देहात में जीजा-साली की मौत की इस दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। देवराहट थाना क्षेत्र के बेड़ौवा गांव से 25 सितंबर को लापता हुए 25 वर्षीय उमाकांत निषाद और उसकी 16 साल की नाबालिग साली के क्षत-विक्षत शव गुरुवार को मूसानगर थाना क्षेत्र के किशवा दुरौली गांव के जंगल में मिले। पुलिस को मौके से सल्फास की गोलियां और दो गिलास बरामद हुए हैं, जिससे सुसाइड की आशंका जताई जा रही है। शवों को जंगली जानवरों ने नोंच लिया लगता है। परिवार की शिकायत पर भी समय पर एक्शन न लेने के चलते एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने देवराहट थाने के एसओ को तत्काल निलंबित कर दिया है।

प्रेम संबंध की पूरी कहानी: परिवार की समझाइश भी काम न आई

उमाकांत निषाद राजपुर थाना क्षेत्र के खरतला गांव का रहने वाला था, जिसकी शादी तीन साल पहले मूसानगर के किशवा दुरौली निवासी राम सहाय की बेटी रिंकी उर्फ रूपम से हुई थी। ससुराल आने-जाने के दौरान उमाकांत का अपनी साली से अफेयर हो गया। परिवार वालों ने कई बार समझाया, लेकिन किशोरी नहीं मानी। आखिरकार माता-पिता ने उससे रिश्ता तोड़ दिया और वह डेढ़ साल से बेड़ौवा गांव में अपने पारिवारिक दादा रामदीन के यहां रह रही थी।

रामदीन ने हमें ग्राउंड से बातचीत में भावुक होकर बताया, “25 सितंबर को उमाकांत आया और पोती को लेकर चला गया। हमने सोचा शायद घुमाने ले गया होगा, लेकिन जब लौटे नहीं तो 30 सितंबर को देवराहट पुलिस को सूचना दी। लेकिन पुलिस ने कोई तवज्जो नहीं दी। अब ये शव मिले हैं, मेरा दिल टूट गया है। वो बच्ची तो बस प्रेम में अंधी हो गई थी, हम क्या करते?” किशोरी की मां रोते हुए बोलीं, “मेरी बेटी को हमने समझाया था कि ये रिश्ता गलत है, लेकिन वो नहीं मानी। अब वो चली गई, हमारी जिंदगी उजड़ गई। हे भगवान, ऐसा क्यों हुआ?” यह प्रेम कहानी समाज की रूढ़ियों से टकराई, लेकिन अंत में दोनों की जान ले ली।

शव मिलने की दर्दनाक दास्तां: जंगली जानवरों ने नोंचा

गुरुवार को किशवा दुरौली के जंगल में ग्रामीणों ने दो शव देखे, जो बुरी तरह क्षत-विक्षत थे। सूचना पर सीओ भोगनीपुर संजय सिंह और एसओ मूसानगर काली चरण मौके पर पहुंचे। उमाकांत के आधार कार्ड से पहचान हुई और परिवार को बुलाया गया। रामदीन ने कहा, “शव देखकर हमारी रूह कांप गई। जानवरों ने नोंच लिया था, हमारी बच्ची का चेहरा तक पहचान में नहीं आ रहा। पुलिस ने पहले क्यों नहीं खोजा?” पुलिस का मानना है कि दोनों ने सल्फास खाकर सुसाइड किया, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है। इलाके के एक ग्रामीण ने भावुक होते हुए कहा, “ये जंगल सुनसान है, यहां कोई नहीं जाता। दोनों ने यहां आकर जान दी, लेकिन परिवार का दर्द देखकर कलेजा फट जाता है।”

पुलिस की लापरवाही उजागर: एसओ पर गिरी गाज

परिवार ने 30 सितंबर को देवराहट थाने में लापता होने की रिपोर्ट दी थी, लेकिन एसओ ने कोई कार्रवाई नहीं की। एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने हमें बताया, “लापरवाही साफ थी, इसलिए एसओ को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया। मामले की जांच चल रही है, दोषियों पर सख्त ऐक्शन होगा।” किशोरी के पिता राम सहाय ने आरोप लगाते हुए कहा, “पुलिस ने हमारी फरियाद सुनी ही नहीं, अगर समय पर तलाश होती तो शायद बच्चे बच जाते। अब न्याय की उम्मीद है, लेकिन हमारा घर तो उजड़ चुका।” यह घटना पुलिस की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है, खासकर नाबालिगों से जुड़े मामलों में।

परिवार में शोक की लहर!

दोनों परिवारों में मातम पसरा है। उमाकांत की पत्नी रूपम सदमे में है, वह बोलीं, “मेरा पति और बहन दोनों चले गए, मैं अकेली रह गई। ये प्रेम ने सब बर्बाद कर दिया।” गांव के बुजुर्गों ने कहा कि ऐसे रिश्तों से बचना चाहिए, लेकिन युवाओं को समझाना मुश्किल है। पुलिस ने मामले को आत्महत्या मानकर जांच शुरू कर दी है, लेकिन कोई पुरानी रंजिश भी खंगाली जा रही है।

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