जी20 जोहान्सबर्ग समिट 2025: पीएम मोदी का वैश्विक विकास पर सख्त संदेश, अमेरिका की गैरमौजूदगी में रामफोसा का ‘खाली कुर्सी’ वाला तंज

जोहान्सबर्ग की धरती पर पहली बार जी20 की मेजबानी कर रही दक्षिण अफ्रीका ने वैश्विक नेताओं को न सिर्फ विकास की नई राह दिखाई, बल्कि अमेरिका की बहिष्कार वाली चुप्पी पर भी सीधी बात रखी। पीएम नरेंद्र मोदी का भाषण और नेताओं से मिलन यहां का सबसे बड़ा हाइलाइट साबित हुआ, जहां भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती दी।

जी20 जोहान्सबर्ग समिट 2025 का आगाज शनिवार को जोरदार हुआ, जब पीएम मोदी ने समिट के पहले सेशन में वैश्विक विकास के पुराने पैटर्न पर सवाल खड़े कर दिए। अफ्रीका में पहली दफा हो रही इस महासभा में मोदी ने कहा कि मौजूदा विकास मॉडल ने संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया है, जिससे बड़े आबादी वाले इलाके पीछे छूट गए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि हम विकास के मानदंडों पर दोबारा सोचें और समावेशी, टिकाऊ ग्रोथ को प्राथमिकता दें। यह सेशन ‘इनक्लूसिव एंड सस्टेनेबल इकोनॉमिक ग्रोथ: लीविंग नो वन बिहाइंड’ पर केंद्रित था, जहां भारत की सभ्यतागत सोच- इंटीग्रल ह्यूमनिज्म- को वैश्विक समाधान के रूप में पेश किया गया।

पीएम मोदी की नेताओं से गर्मजोशी भरी बातचीत: मेलोनी और लूला संग हंसी-मजाक

समिट पहुंचते ही पीएम मोदी ने वैश्विक नेताओं के साथ अनौपचारिक बातचीत शुरू कर दी। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ उनकी मुलाकात सबसे ज्यादा चर्चा में रही- दोनों ने हंसते-बतियाते हाथ मिलाया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मेलोनी के साथ यह तीसरी बड़ी मुलाकात थी, जहां दोनों ने यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार व तकनीक पर फोकस किया। इसी तरह, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को मोदी ने गले लगाकर स्वागत किया। लूला के साथ बातचीत में भारत-ब्राजील के बीच व्यापार बढ़ाने और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने पर जोर रहा।

इसके अलावा, मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर, मलेशिया के अनवर इब्राहिम और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से भी हाथ मिलाया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ उनकी चर्चा उत्पादक रही, जहां जलवायु परिवर्तन और वैश्विक शासन सुधार पर भारत का स्टैंड साझा किया गया। ये मुलाकातें समिट के साइडलाइंस में हुईं, जो ग्लोबल साउथ की एकजुटता को रेखांकित करती हैं।

जी20 जोहान्सबर्ग समिट 2025 में मोदी का भाषण: तीन नई पहलें, विकास की नई दिशा

मोदी का 10 मिनट का संबोधन समिट का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों- जैसे कर्ज का बोझ, जलवायु संकट और डिजिटल डिवाइड- पर भारत का नजरिया रखा। पुराने विकास मॉडल को ‘रिसोर्स-डिप्राइविंग’ बताते हुए उन्होंने अफ्रीका के संदर्भ में कहा कि महाद्वीप का विकास ही वैश्विक प्रगति की कुंजी है।

इसके साथ ही, मोदी ने तीन ठोस प्रस्ताव पेश किए:

  • ग्लोबल ट्रेडिशनल नॉलेज रिपॉजिटरी: भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित, जो पारंपरिक चिकित्सा और सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देगी।
  • जी20-एफ्रीका स्किल्स मल्टीप्लायर इनिशिएटिव: अफ्रीका के युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट, जो मानव पूंजी को मजबूत करेगी।
  • ड्रग-टेरर नेक्सस पर जी20 इनिशिएटिव: फेंटेनिल जैसी खतरनाक ड्रग्स और आतंकवाद के लिंक को तोड़ने के लिए वैश्विक टीम।

ये सुझाव भारत की 2023 जी20 प्रेसिडेंसी के ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ विजन को आगे बढ़ाते हैं। समिट की डिक्लेरेशन में भी इन मुद्दों को जगह मिली, जो जलवायु कार्रवाई और गरीब देशों के कर्ज राहत पर फोकस करती है।

रामफोसा का अमेरिका पर तंज: 2026 अध्यक्षता ‘खाली कुर्सी’ को सौंपी जाएगी

दूसरी तरफ, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने अमेरिका की अनुपस्थिति पर सीधा प्रहार किया। जी20 जोहान्सबर्ग समिट 2025 में अमेरिकी प्रतिनिधि न आने के कारण रामफोसा ने कहा कि 2026 की अध्यक्षता वे ‘खाली कुर्सी’ को सौंपेंगे। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों पर बहिष्कार किया था, जिससे समिट की डिक्लेरेशन अमेरिका के बिना ही अपनाई गई। रामफोसा के प्रवक्ता ने साफ कहा कि चार्ज डी अफेयर्स को हैंडओवर स्वीकार नहीं होगा- यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।

समिट में यूएस की गैरमौजूदगी के बावजूद सहमति बनी, जहां ग्लोबल साउथ के मुद्दे- जैसे डेब्ट सस्टेनेबिलिटी और एनर्जी ट्रांजिशन- को प्राथमिकता दी गई। रामफोसा ने जोर दिया कि अफ्रीका की पहली जी20 प्रेसिडेंसी वैश्विक सहयोग को मजबूत करेगी, भले ही चुनौतियां हों।

जी20 जोहान्सबर्ग समिट 2025 के दूसरे दिन और भी अहम चर्चाएं होंगी, जहां भारत की भूमिका केंद्र में रहेगी।

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