हंगामे भरी वोटिंग का अंत, EVM में कैद हुईं उम्मीदवारों की उम्मीदें
बिहार की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। सुबह सात बजे शुरू हुई वोटिंग शाम छह बजे थम गई, लेकिन बीच में हुईं 12 बड़ी घटनाओं ने पूरे पहले चरण को यादगार बना दिया। 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर 1314 उम्मीदवारों की साख दांव पर लगी रही, और अब नतीजों का इंतजार 14 नवंबर को होगा।
बिहार विधानसभा चुनाव पहला चरण में कुल 60.25 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के ग्रामीण इलाकों में उत्साह तो दिखा, लेकिन शहरी क्षेत्रों में वैसा जोश नजर नहीं आया। बेगूसराय जिले ने सबसे ऊंचा रिकॉर्ड बनाया, जहां 67.32 प्रतिशत वोट पड़े, वहीं शेखपुरा में महज 52.36 प्रतिशत ही मतदाता पहुंचे। राजधानी पटना में 55.02 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो उम्मीद से थोड़ी कम रही। कुल मिलाकर, 243 सीटों वाले बिहार विधानसभा चुनाव के इस पहले दौर में दो फेज में फैले मुकाबले की शुरुआत हो चुकी है।
वोटिंग का जिला-वार नक्शा: जहां उत्साह चरम पर, वहां ठंडक भी
ग्राउंड पर घूमते हुए साफ दिखा कि ग्रामीण मतदाता ज्यादा सक्रिय रहे। बेगूसराय के अलावा वैशाली और सारण जैसे जिलों में भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला, लेकिन शहरी केंद्रों में चुप्पी साधी रही। पटना के कुम्हरार में सिर्फ 39.52 प्रतिशत, दीघा में 39.10 प्रतिशत और बांकीपुर में 40 प्रतिशत ही मतदान हुआ। ये आंकड़े बताते हैं कि शहरों में व्यस्तता या अन्य कारणों से लोग बूथों तक कम पहुंचे।
अतिसंवेदनशील बूथों पर सख्ती, लेकिन चुनौतियां बरकरार
56 अतिसंवेदनशील बूथों पर शाम पांच बजे ही मतदान बंद कर दिया गया, ताकि सुरक्षा को मजबूत रखा जा सके। फिर भी, 10 जिलों में ईवीएम की खराबी ने वोटिंग को कुछ देर ठप कर दिया। वैशाली के लालगंज में तो वोट चोरी के नारे तक लगे, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। नालंदा के तीन बूथों पर तो एक भी वोट नहीं पड़ा, जबकि सीवान, दरभंगा और मुजफ्फरपुर के आठ बूथों पर स्थानीय मुद्दों जैसे सड़क और श्मशान की मांग को लेकर बहिष्कार हुआ।
मुंगेर के नक्सल प्रभावित भीमबंद गांव में 20 साल बाद पहली बार मतदान देखने को मिला, जो एक सकारात्मक संकेत है। यहां सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने लोगों को बूथ तक खींचा। कुल 121 सीटों में से 104 पर सीधा द्विपक्षीय मुकाबला रहा, जबकि 17 पर त्रिकोणीय लड़ाई ने रोमांच बढ़ाया।
12 प्रमुख घटनाएं: हमलों से बहस तक, चुनावी माहौल गरमाया
पहले चरण की वोटिंग के दौरान दर्जनों छोटी-मोटी अफरातफरी हुईं, लेकिन 12 बड़ी घटनाओं ने सुर्खियां बटोरीं। लखीसराय में डिप्टी सीएम की गाड़ी पर हमला हुआ, जहां आरजेडी एमएलसी अजय सिंह और विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा के बीच भिड़ंत हो गई। पटना के मनेर में आरजेडी उम्मीदवार भाई वीरेंद्र ने आईडी चेक पर दरोगा को धमकी दी, कहते हुए कि “यहीं आग लगा देंगे”।
वैशाली में आरजेडी उम्मीदवार रविंदर कुमार सिंह के भड़कावे पर लोगों ने सीएपीएफ जवानों पर पत्थर फेंके। दरभंगा के सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र में पोलिंग एजेंट को धमकी मिली, जिसके बाद पुलिस पर पथराव हुआ और दो लोग हिरासत में लिए गए। सारण के जैतपुर में सीपीआई प्रत्याशी सत्येंद्र कुमार की गाड़ी पर ईंट-पत्थर और लाठियों से हमला बोला गया।
लखीसराय में बूथ कैप्चरिंग की शिकायत पर एसपी ने गांव में एक घंटे का फ्लैग मार्च निकाला। पटना साहिब के बूथ नंबर 238 पर विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव से मतदानकर्मियों की बहस हो गई। नालंदा के बिहारशरीफ में पुलिस ने चार बीजेपी कार्यकर्ताओं को पर्ची बांटने के आरोप में हिरासत में लिया। ये घटनाएं बताती हैं कि चुनावी जंग कितनी तीखी रही।
दांव पर बड़े चेहरे: 10 हॉट सीट्स पर नजरें टिकीं
इस चरण में दो डिप्टी सीएम समेत 18 मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है। तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा और अनंत सिंह जैसे दिग्गजों की सीटें हॉट हैं। 10 ऐसी प्रमुख सीटें जहां मुकाबला कांटे का रहा – मनेर, वैशाली, दरभंगा, सारण, लखीसराय, पटना साहिब, सीवान, मुजफ्फरपुर, नालंदा और मुंगेर। इन पर नजरें टिके रहेंगी, क्योंकि ये राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगी।
अगले चरण की तैयारी तेज हो चुकी है, और बिहार के मतदाता फिर मैदान में उतरेंगे। 14 नवंबर को आने वाले नतीजे ही बताएंगे कि ये वोट किस तरफ झुके।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध आंकड़ों और ग्राउंड रिपोर्ट्स पर आधारित है। अंतिम आंकड़े निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए जाएंगे। कोई भी अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोतों का सहारा लें।
