दशहरे की शाम खुशियां मनाने निकले परिवारों पर मौत का साया छा गया, जब दुर्गा मां की विदाई का जुलूस तालाब की गहराई में समा गया। गांव की सड़कें अब चीखों से गूंज रही हैं, जहां मां-बाप अपनी बच्चियों की तलाश में बिलख रहे हैं।
खंडवा (मध्यप्रदेश), 02 अक्टूबर: मध्यप्रदेश के खंडवा में दुर्गा विसर्जन हादसा ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। पंधाना क्षेत्र के अर्दला गांव में गुरुवार शाम करीब 6 बजे दुर्गा प्रतिमा विसर्जित करने जा रहे 20-25 लोगों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली तालाब में पलट गई, जिससे कई लोग डूब गए। अब तक 11 शव निकाले जा चुके हैं, जिनमें 8 मासूम बच्चियां शामिल हैं।
पुलिस और प्रशासन की टीमों ने जेसीबी की मदद से ट्रॉली को बाहर निकाला, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।52ea56 स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि राजगढ़ ग्राम पंचायत के पाडलाफाटा से लोग ट्रॉली में सवार होकर अर्दला पहुंचे थे, लेकिन पुलिया पर खड़ी ट्रॉली अचानक असंतुलित होकर पानी में गिर गई।
हादसे की पूरी आपबीती: खुशी की शाम कैसे बदली मातम में
राजगढ़ पंचायत के लोग दुर्गा मां की मूर्ति लेकर विसर्जन के लिए निकले थे, ट्रॉली में महिलाएं, बच्चे और युवक सब सवार थे। एक प्रत्यक्षदर्शी ने ग्राउंड से हमें बताया, “हम तो मां दुर्गा को विदा करने की खुशी में गा-बजा रहे थे, लेकिन पुलिया पर ट्रॉली हिली और सब पानी में समा गए। चीखें सुनकर दिल कांप गया।” ट्रॉली तालाब के रास्ते में पलट गई, और तेज धारा ने लोगों को बहा ले गई। शाम 6 बजे तक बचाव दल ने 11 शव बरामद किए, लेकिन कई अभी लापता हैं।
एक पीड़ित परिवार की महिला रोते हुए बोलीं, “मेरी दो बच्चियां तो बस खेलते-खेलते ट्रॉली में चढ़ गईं थीं, अब वो कहां हैं? हे मां दुर्गा, तू ही उन्हें बचा ले, वो तेरी पूजा करने आई थीं।” गांव के बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा, “ये दशहरा हमारे लिए काला दिन बन गया, घरों में अब सिर्फ आंसू बह रहे हैं।” हादसे के बाद अफरातफरी मच गई, लोग एक-दूसरे को पुकारते रहे, लेकिन पानी की गहराई ने सब कुछ निगल लिया। यह घटना ग्रामीण इलाकों में विसर्जन जुलूसों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है, जहां अक्सर ओवरलोड वाहन इस्तेमाल होते हैं।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई: रेस्क्यू में जुटी टीमें
सूचना मिलते ही पंधाना थाने की पुलिस और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। इंस्पेक्टर ने बताया, “हमने जेसीबी से ट्रॉली निकाली और गोताखोरों को लगाया, लेकिन शाम तक 11 शव ही मिल सके। रातभर सर्च जारी रहेगा।” जिला कलेक्टर ने भी घटनास्थल का दौरा किया और परिवारों को सहायता का आश्वासन दिया। एक पुलिसकर्मी ने दर्द भरी आवाज में कहा, “बच्चियों के शव निकालते वक्त हमारा भी कलेजा मुंह को आ गया, लेकिन ड्यूटी है, हम कोशिश कर रहे हैं कि कोई और जिंदा मिल जाए।”
इलाके में अब गश्त बढ़ा दी गई है, और प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की है कि आखिर ट्रॉली क्यों पलटी। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया की खराब हालत भी वजह हो सकती है, जिस पर पहले से शिकायतें थीं। रेस्क्यू में स्थानीय युवकों ने भी मदद की, लेकिन पानी का स्तर ज्यादा होने से मुश्किलें बढ़ रही हैं।
परिवारों का दर्द और गांव का सन्नाटा: बच्चियों की याद में बहते आंसू
हादसे में मारी गईं 8 बच्चियां गांव की आंखों का तारा थीं, जिनकी मौत से घर-घर मातम पसरा है। एक पिता ने आंसू पोछते हुए कहा, “मेरी बेटी तो सुबह से उत्साह में थी कि मां दुर्गा को विदा करने जाएगी, अब वो कभी नहीं लौटेगी। ये कैसी विडंबना है?” गांव की महिलाएं एक साथ बैठकर रो रही हैं, “हमारी लाड़ली बच्चियां पानी में चली गईं, अब कौन हमें हंसाएगा?” पूरा अर्दला गांव सन्नाटे में डूबा है, जहां दशहरे की रौनक अब शोक में बदल गई।
यह दुर्घटना मध्यप्रदेश में उत्सवों के दौरान सुरक्षा की लापरवाही को उजागर करती है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां संसाधन कम हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को सहायता राशि देने की घोषणा की है।
