सक्ती जिले के वेदांता प्लांट में मंगलवार दोपहर हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट ने दर्जनों परिवारों को बर्बाद कर दिया। देर रात तक अस्पतालों से आती मौत की खबरों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
छत्तीसगढ़ वेदांता पावर प्लांट हादसे ने तोड़ा मजदूर परिवारों का सहारा
रायगढ़/रायपुर। छत्तीसगढ़ वेदांता पावर प्लांट हादसे में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बुधवार सुबह तक इस दर्दनाक हादसे में 17 मजदूरों की जान जा चुकी है, जबकि 36 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलसकर जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। मंगलवार दोपहर प्लांट के अंदर बॉयलर फटने से हुई इस त्रासदी के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। प्लांट के बाहर जमा मजदूरों के परिजनों ने हंगामा करते हुए प्रबंधन पर जानकारी छिपाने और मुआवजे में देरी का आरोप लगाया है।
जिंदल और कालड़ा अस्पताल में गूंज रही चीखें, 100% तक झुलसे हैं मरीज
इस भीषण हादसे में 36 से अधिक लोग आग की भेंट चढ़ गए। प्रशासनिक जानकारी के मुताबिक, 4 मजदूरों की मौत विस्फोट के दौरान मौके पर ही हो गई थी। वहीं 6 लोगों ने रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दम तोड़ा। 5 की मौत जिला अस्पताल रायगढ़ और 2 की मौत रायपुर के कालड़ा अस्पताल में हुई। फिलहाल 18 घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
रायगढ़ के जिंदल अस्पताल में भर्ती 10 मजदूरों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार ये सभी 15 प्रतिशत से लेकर 95-100 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं। अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे घायलों में मनीष गिरी, कार्तिक महतो, बृजेश कुमार, केशव चंद्रा, भुवनेश्वर चंद्रा, अभिषेक चंद्रा, नदीम अंसारी, मिलन वारे, संदीप और शिवनाथ मुर्मू शामिल हैं। वहीं बालाजी मेट्रो हॉस्पिटल में बनवारी लाल, उपेंद्र और परदेशी लाल चंद्रा का इलाज जारी है। दो अन्य मजदूर उमेंद्र और किस्मत अली को रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
4 राज्यों के मजदूर बने काल का ग्रास, आंकड़ों ने बढ़ाई टेंशन
इस हादसे ने चार राज्यों के परिवारों को बेघर कर दिया है। वेदांता प्लांट के सिक्योरिटी हेड प्रेम झा ने बताया कि अब तक मरने वाले 17 लोगों में सिर्फ 4 लोग ही छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं, जबकि शेष 13 मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से थे। बाहरी राज्यों के मृतकों की पहचान और परिजनों तक सूचना पहुंचाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। कुछ परिजनों का आरोप है कि प्रबंधन उन्हें लापता मजदूरों की सही जानकारी नहीं दे रहा है।
मुआवजे की हुई बरसात: PMO से लेकर वेदांता तक ने खोली तिजोरी
हादसे के बाद मुआवजे को लेकर केंद्र से लेकर राज्य और कंपनी प्रबंधन तक सक्रिय हो गए हैं। वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिवार वालों को 35-35 लाख रुपए की सहायता राशि के साथ ही एक-एक सदस्य को नौकरी देने का बड़ा ऐलान किया है। इसके अलावा गंभीर रूप से घायल हुए मजदूरों को 15-15 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी।
इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने पीएम नेशनल रिलीफ फंड (PMNRF) से हर मृतक के परिवार को 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए देने की घोषणा की थी। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए राज्य सरकार की ओर से मृतक परिवारों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए देने की बात कही है।
‘लापरवाही बर्दाश्त नहीं’: CM बोले- दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पूरे घटनाक्रम पर दुख जताते हुए कहा कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। छत्तीसगढ़ के श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने स्पष्ट किया कि तत्काल जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “हादसे के लिए जिम्मेदार दोषियों पर श्रम कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।”
कांग्रेस ने की एक-एक करोड़ मुआवजे की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए राज्य सरकार को घेरने की कोशिश की। उन्होंने मांग की कि मृतकों के परिवार को 1-1 करोड़ रुपए और गंभीर घायलों को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा तत्काल दिया जाए। वहीं प्लांट के बाहर मजदूर परिवारों का हंगामा देर शाम तक जारी रहा।
