पटना के लोकभवन में सुबह 11 बजे बिहार की सियासत ने नया मोड़ लिया। करीब दो दशक तक सूबे की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार ने विराम लगाया और भाजपा कोटे से सम्राट चौधरी को राज्य की 24वीं गद्दी सौंप दी गई।
बिहार के 24वें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ईश्वर के नाम पर ली शपथ
पटना। सोमवार को नीतीश कुमार के अचानक इस्तीफे के बाद मंगलवार सुबह से ही राजधानी की फिजा बदली-बदली नजर आई। बिहार के 24वें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोकभवन में आयोजित एक सादे लेकिन गरिमामयी समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने ठीक 11 बजे उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण से पहले सम्राट चौधरी ने पटना के प्रसिद्ध पंचमुखी हनुमान मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और बजरंग बली का आशीर्वाद लिया। उनकी सुरक्षा व्यवस्था सोमवार रात से ही बेहद चाक-चौबंद कर दी गई थी, जो अब मुख्यमंत्री स्तर की हो गई है।
नई टीम में दो उपमुख्यमंत्री, नीतीश रहे खामोश गवाह
शपथ ग्रहण समारोह में सबसे बड़ी हैरानी रही नीतीश कुमार की मौजूदगी। अब तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले नीतीश इस बार दर्शक दीर्घा में बैठे मूक दर्शक बने रहे। उनके साथ ही जदयू के दो दिग्गज नेताओं विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव ने भी शपथ ली। दोनों को बिहार का उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया है। हालांकि अभी पूरे मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ है और विभागों का बंटवारा बाकी है। सूत्रों के मुताबिक जल्द ही एनडीए गठबंधन के कोटे से अन्य मंत्रियों को भी शपथ दिलाई जाएगी।
‘कभी-कभी ईश्वर की कृपा होती है’: पिता के मुंह से छलका दर्द और सियासी हकीकत
शपथ ग्रहण के बाद जब सम्राट चौधरी के पिता और कद्दावर नेता शकुनी चौधरी से बातचीत हुई तो उनके चेहरे पर बेटे के मुख्यमंत्री बनने की खुशी के साथ-साथ लंबे संघर्ष का दर्द भी साफ झलका। उन्होंने कहा, “कभी-कभी ईश्वर की कृपा होती है। हमने कई पार्टियों के लिए पूरी लड़ाई लड़ी, लेकिन सफलता नहीं मिली। आज अमित शाह, नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की कृपा से सम्राट आगे बढ़ गया। मेहनत रंग लाती है, जो मेहनत करेगा वही आगे बढ़ेगा।” शकुनी चौधरी का यह बयान बिहार की सियासत में उनकी लंबी पारी और अब मिले इनाम की गवाही दे रहा था।
20 साल बाद नीतीश मुक्त, अब राज्यसभा की राह
यह राजनीतिक बदलाव सोमवार शाम उस वक्त तय हो गया था जब नीतीश कुमार ने राजभवन जाकर अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया। नीतीश कुमार करीब 20 वर्षों तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। अब उनके कंधों से सूबे की जिम्मेदारी उतर चुकी है और वे राज्यसभा सदस्य के तौर पर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। पार्टी सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में केंद्र सरकार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका तय है।
क्या कहती है राजनीतिक पृष्ठभूमि?
सम्राट चौधरी का नाम बिहार भाजपा के कद्दावर ओबीसी चेहरों में शुमार किया जाता है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में वे पहले उपमुख्यमंत्री की भूमिका निभा रहे थे। अब उनके कंधों पर न सिर्फ सरकार चलाने की चुनौती है बल्कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में एनडीए को जिताने की बड़ी जिम्मेदारी भी है। फिलहाल मंत्रिमंडल के ऐलान का सबको इंतजार है कि नई सरकार में किसे जगह मिलती है और कौन बाहर रह जाता है।
