जस्टिस सूर्यकांत बने देश के 53वें सीजेआई, राष्ट्रपति मुर्मू ने दिलाई शपथ

नयी दिल्ली: सोमवार सुबह राष्ट्रपति भवन में हुए एक ऐतिहासिक समारोह में जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के रूप में शपथ ग्रहण कर लिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक मौके पर देश के शीर्ष न्यायिक और राजनीतिक हस्तियों ने शिरकत की।

जी-20 समिट से लौटते ही PM मोदी पहुंचे समारोह में

यह समारोह इसलिए भी खास रहा क्योंकि जोहांसबर्ग से जी-20 समिट में हिस्सा लेकर लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीधे राष्ट्रपति भवन पहुंचे और इस कार्यक्रम में शामिल हुए। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समेत कई अन्य कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ नौकरशाह भी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।

सीजेआई के तौर पर 15 महीने रहेंगे कार्यरत

जस्टिस सूर्यकांत के पास अब मुख्य न्यायाधीश के रूप में 10 नवंबर, 2024 तक यानी लगभग 15 महीने का कार्यकाल रहेगा। इस दौरान उनके सामने न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने, लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने और तकनीकी के जरिए न्यायिक सुधारों को गति देने जैसी अहम चुनौतियाँ होंगी। वह सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजय किशन कौल की सेवानिवृत्ति के बाद कॉलेजियम के अगले प्रमुख भी होंगे।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से निकलकर सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

जस्टिस सूर्यकांत का न्यायिक सफर काफी शानदार रहा है। फरवरी 2021 में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में उनकी नियुक्ति से पहले, वह पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे। उनके कार्यकाल में हरियाणा की ‘असाधारण विशेषताओं वाली’ भूमि संबंधी नीति को रद्द करने और सार्वजनिक स्थानों पर शराबबंदी पर रोक लगाने जैसे अहम फैसले शामिल हैं। उन्हें एक ऊर्जावान और सक्रिय जज के तौर पर जाना जाता है।

न्यायपालिका में सुधार और तकनीकी अपग्रेड पर रहेगा फोकस

विश्लेषकों का मानना है कि जस्टिस सूर्यकांत के कार्यकाल में ई-कोर्ट प्रोजेक्ट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी डिजिटल पहलों को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित रिट याचिकाओं और महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों का निपटारा भी उनके सामने एक प्रमुख कार्य होगा। पूर्ववर्ती सीजेआई जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ द्वारा शुरू किए गए कई सुधार Initiatives को उनसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब उन पर होगी।

इस नई भूमिका में जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व में भारतीय न्यायपालिका किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह पूरे देश के लिए देखने वाली एक महत्वपूर्ण घटना होगी। उनका कार्यकाल संविधान की मर्यादा को बनाए रखते हुए आम आदमी तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित होगा।

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