घोसी उपचुनाव: अखिलेश सुधाकर सिंह के बेटे सुजीत को देंगे टिकट? भाजपा में विजय राजभर मजबूत दावेदार, यूपी की पहली सीट जहां एक टर्म में दो बार मतदान!

मऊ की घोसी विधानसभा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है।
सपा के कद्दावर नेता सुधाकर सिंह के अचानक निधन से यहां जल्द ही उपचुनाव होने वाला है – और यह किसी भी विधानसभा टर्म में दो बार उपचुनाव वाली यूपी की पहली सीट बन जाएगी।

घोसी उपचुनाव अब तय है। 20 नवंबर को लखनऊ के मेदांता अस्पताल में 67 साल की उम्र में सुधाकर सिंह ने अंतिम सांस ली। वह 2023 के उपचुनाव में भाजपा के दिग्गज दारा सिंह चौहान को करीब 43 हजार वोटों से हराकर विधायक बने थे। उससे पहले 2022 में दारा सिंह ही सपा के टिकट पर जीते थे, लेकिन भाजपा में लौटते ही इस्तीफा दे दिया – जिससे पहला उपचुनाव हुआ। अब सुधाकर के जाने से घोसी उपचुनाव फिर से हो रहा है। नियम के मुताबिक रिक्त सीट पर छह महीने में चुनाव कराना जरूरी है, लिहाजा अगले कुछ महीनों में यहां फिर मतदान होगा।

सुधाकर सिंह का निधन कैसे हुआ?

परिवार के मुताबिक 17 नवंबर को सुधाकर दिल्ली में मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी के रिसेप्शन में गए थे। 18 नवंबर की रात लौटते ही तबीयत बिगड़ी। पहले वाराणसी फिर लखनऊ मेदांता में भर्ती कराया गया। हार्ट की पुरानी समस्या थी, 2022 में पेसमेकर भी लगा था। सुबह करीब सात बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। निधन की खबर मिलते ही सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव अस्पताल पहुंचे और परिवार से मिलकर संवेदना जताई।

घोसी उपचुनाव: सपा में किसे मिलेगा टिकट?

सूत्रों की मानें तो सपा यहां सहानुभूति का पूरा फायदा उठाना चाहेगी। सुधाकर सिंह के छोटे बेटे डॉ. सुजीत सिंह सबसे मजबूत दावेदार हैं। सुजीत घोसी में दो बार ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं, राजनीति में सक्रिय हैं और इलाके में अच्छी पकड़ रखते हैं। अखिलेश जब परिवार से मिले तो सुजीत ने उनके पैर पकड़कर रोना शुरू कर दिया था – उस मंजर ने साफ संकेत दे दिया कि पार्टी परिवार से ही उम्मीदवार उतारेगी। बड़ा बेटा अजीत प्रताप सिंह फिलहाल राजनीति से दूर हैं।

भाजपा के लिए मुश्किल चुनौती

पिछली बार मंत्री दारा सिंह चौहान की हार से भाजपा को काफी किरकिरी झेलनी पड़ी थी। अब दारा एमएलसी बन चुके हैं, ऐसे में पार्टी दोबारा उन्हें उतारने का रिस्क शायद न ले। भाजपा की नजर पूर्व विधायक विजय राजभर पर है। विजय राजभर कभी इसी सीट से विधायक रह चुके हैं और राजभर वोटों में अच्छी पैठ रखते हैं। चौहान समाज के वोट भी उनके साथ जुड़ सकते हैं।

हालांकि भाजपा के गठबंधन में पेंच फंस सकता है। सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर अपने बेटे अनिल राजभर को विधायक बनाने के लिए इस सीट पर दावा ठोक सकते हैं। लोकसभा में अनिल की हार के बाद ओम प्रकाश राजभर वोटों का मजबूत आधार दिखाकर दबाव बना रहे हैं।

घोसी का जातीय समीकरण क्या कहता है?

घोसी में करीब 4.5 लाख से ज्यादा वोटर हैं।

  • मुस्लिम: 90 हजार से ऊपर – सबसे बड़ा फैक्टर
  • दलित: 70 हजार के करीब
  • यादव: 56 हजार
  • राजभर: 52 हजार
  • चौहान: 46 हजार

इसके अलावा क्षत्रिय, निषाद, मौर्य, भूमिहार भी 10-10 हजार से ज्यादा हैं। मुस्लिम-दलित-यादव का पीडीए फॉर्मूला सपा के लिए मजबूत है, जबकि राजभर-चौहान भाजपा और सुभासपा की ताकत।

घोसी सीट का इतिहास

1957 में सीट बनी। अब तक 19 चुनाव हो चुके। फागू चौहान सबसे ज्यादा 5 बार जीते। सिर्फ एक बार 1974 में मुस्लिम उम्मीदवार जीता। भाजपा यहां 4 बार, सपा-कांग्रेस 3-3 बार, भाकपा 4 बार जीती। 2022 से 2027 के इस टर्म में दो उपचुनाव का रिकॉर्ड कोई दूसरी सीट नहीं बना पाई।

घोसी उपचुनाव सिर्फ एक सीट का भरना नहीं, बल्कि 2027 से पहले योगी सरकार और विपक्ष की ताकत का ताजा टेस्ट होगा। दावेदारों की लाइन लग चुकी है, अब देखना यह है कि सहानुभूति किसकी झोली भरती है और जातीय गणित कौन बेहतर साध पाता है। आने वाले दिन पूर्वांचल की सियासत में नया अध्याय लिखने वाले हैं।

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