राघोपुर विधानसभा चुनाव परिणाम 2025: बिहार की राजनीति में एक बार फिर राघोपुर का नाम चमका है। तेजस्वी यादव ने यहां तीसरी बार लगातार जीत के साथ अपना दबदबा कायम रखा, जो राज्य की सियासत के लिए बड़ा संकेत है।
राघोपुर विधानसभा चुनाव परिणाम 2025 ने साबित कर दिया कि यह सीट अभी भी आरजेडी का मजबूत किला बनी हुई है। 6 नवंबर को हुए मतदान के बाद आए नतीजों में तेजस्वी प्रसाद यादव ने बीजेपी के सतीश कुमार यादव को 14,532 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया।
क्षेत्र के मतदाताओं ने एक बार फिर यादव परिवार के प्रभाव को महसूस कराया, जहां पारंपरिक समर्थन ने निर्णायक भूमिका निभाई। यह जीत न सिर्फ तेजस्वी की लोकप्रियता का आईना है, बल्कि बिहार की पिछड़ी और अल्पसंख्यक आबादी की राजनीतिक प्राथमिकताओं को भी उजागर करती है।
राघोपुर में तेजस्वी की जीत: वोट गिनती और प्रमुख आंकड़े
चुनावी जंग में अंतिम घड़ी तक कांटे की टक्कर चली, लेकिन आखिरकार तेजस्वी ने बाजी मार ली। आरजेडी को मिले वोटों की संख्या ने बीजेपी के उम्मीदवार को पीछे धकेल दिया, जहां सतीश कुमार की कोशिशें नाकाफी साबित हुईं। यह नतीजा राघोपुर के ग्रामीण इलाकों से लेकर नदी किनारे बसे गांवों तक फैले समर्थन का प्रतिबिंब है, जहां जमीनी मुद्दे जैसे रोजगार और विकास ने वोटिंग को प्रभावित किया।
राघोपुर विधानसभा चुनाव परिणाम 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो तेजस्वी को कुल वोटों का बड़ा हिस्सा मिला। बीजेपी की ओर से सतीश कुमार ने कड़ी मेहनत की, लेकिन यादव-प्रधान क्षेत्र में आरजेडी की पकड़ ढीली पड़ने का नामोनिशान नहीं रहा। मतगणना केंद्रों पर सुबह से शाम तक चले ड्रामे के बाद यह स्पष्ट हो गया कि तेजस्वी का कुनबा यहां अटल है।
पिछले चुनावों से तुलना: तेजस्वी का बढ़ता वर्चस्व
राघोपुर की यह सीट हमेशा से यादव समुदाय का गढ़ रही है, लेकिन तेजस्वी ने इसे अपनी निजी ताकत बना लिया। 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने 91,236 वोट हासिल कर सतीश कुमार के 68,503 वोटों को 22,733 वोटों के अंतर से मात दी थी। उस समय आरजेडी की लहर ने क्षेत्र की अन्य पिछड़ी जातियों और मुस्लिम वोटबैंक को भी एकजुट किया था।
फिर आया 2020 का दौर, जहां तेजस्वी ने और मजबूती दिखाई। 97,404 वोटों के साथ उन्होंने सतीश कुमार के 59,230 वोटों को 38,174 वोटों के फासले से धूल चटा दी। उस चुनाव में मतदान प्रतिशत 58.03 रहा, जिसमें आरजेडी को 48.74 फीसदी वोट शेयर मिला। अब 2025 में अंतर घटकर 14,532 वोट रह गया, जो बीजेपी की रणनीति की असफलता को दर्शाता है। ये आंकड़े बताते हैं कि तेजस्वी का आधार साल दर साल मजबूत हो रहा है, खासकर ग्रामीण विकास और युवा मुद्दों पर उनकी सक्रियता से।
क्षेत्र की सामाजिक संरचना: यादवों का प्रभाव और अन्य वोटर ग्रुप
राघोपुर विधानसभा क्षेत्र यमुना नदी के किनारे बसा एक ऐसा इलाका है, जहां यादवों की आबादी निर्णायक है। पारंपरिक रूप से आरजेडी का यह गढ़ अब अन्य पिछड़ी जातियों, मुस्लिम मतदाताओं और सामान्य वर्ग के वोटों से भी समृद्ध हो गया है। जमीनी स्तर पर बात करें तो किसानों की समस्याएं, बाढ़ प्रबंधन और स्थानीय रोजगार के वादे यहां वोटिंग को प्रभावित करते रहे हैं।
बीजेपी ने इस बार सतीश कुमार को ही मैदान में उतारा, जो 2020 की हार के बावजूद पार्टी की उम्मीद थे। लेकिन क्षेत्र की विविधता में आरजेडी की समावेशी अपील ने बाजी पलट दी।
मुस्लिम-यादव समीकरण ने एक बार फिर कमाल दिखाया, जबकि सामान्य वर्ग के कुछ वोट बीजेपी की ओर खिसके भी, लेकिन पर्याप्त नहीं। यह चुनाव परिणाम बिहार की जातिगत राजनीति का जीता-जागता उदाहरण है, जहां जड़ें गहरी हैं।
राघोपुर विधानसभा चुनाव रिजल्ट 2025: जानिए किस उम्मीदवार को कितना मिला वोट
| क्रम संख्या | प्रत्याशी का नाम | दल का नाम | ई.वी.एम. मत | डाक द्वारा मत | कुल मत | % मत |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | तेजस्वी प्रसाद यादव | राष्ट्रीय जनता दल | 117946 | 651 | 118597 | 49.74 |
| 2 | राजू कुमार | आम आदमी पार्टी | 1319 | 3 | 1322 | 0.55 |
| 3 | सतीश कुमार | भारतीय जनता पार्टी | 103520 | 545 | 104065 | 43.64 |
| 4 | अनिल सिंह | नेशनलिस्ट कॉंग्रेस पार्टी | 982 | 1 | 983 | 0.41 |
| 5 | उमेश महतो | राष्ट्रीय जनसंभावना पार्टी | 451 | 3 | 454 | 0.19 |
| 6 | कविता कुमारी | बिहार जस्टिस पार्टी | 196 | 3 | 199 | 0.08 |
| 7 | चंचल कुमार | जन सुराज पार्टी | 2348 | 51 | 2399 | 1.01 |
| 8 | प्रेम कुमार | जनशक्ति जनता दल | 706 | 3 | 709 | 0.3 |
| 9 | मोहम्मद रिजवानुल आजम | जनता दल राष्ट्रवादी | 403 | 5 | 408 | 0.17 |
| 10 | राम बाबु राय | जनतंत्र आवाज पार्टी | 359 | 1 | 360 | 0.15 |
| 11 | शीलम झा | अखिल हिन्द फारवर्ड ब्लॉक (क्रांतिकारी) | 794 | 0 | 794 | 0.33 |
| 12 | बलीराम सिंह | निर्दलीय | 3086 | 0 | 3086 | 1.29 |
| 13 | वैद्यनाथ कुमार साह | निर्दलीय | 1039 | 0 | 1039 | 0.44 |
| 14 | इनमे से कोई नहीं | इनमें से कोई नहीं | 4025 | 8 | 4033 | 1.69 |
| कुल | 237174 | 1274 | 238448 | |||
तेजस्वी यादव की राजनीतिक यात्रा: क्रिकेट से सियासत तक का सफर
तेजस्वी प्रसाद यादव, बिहार की राजनीति के एक प्रमुख चेहरे, ने क्रिकेट के मैदान से विधानसभा की चौपाल तक का लंबा सफर तय किया है। लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बेटे के रूप में जन्मे इस युवा नेता ने 2015 से अब तक कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का केंद्रीय स्तंभ बने रहे।
प्रारंभिक जीवन और राजनीति में प्रवेश
तेजस्वी का जन्म 9 नवंबर 1989 को पटना में हुआ। बचपन से ही राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े, लेकिन उन्होंने पहले खेल की दुनिया को चुना। दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए आईपीएल में खेलने वाले तेजस्वी ने 2010 में ही आरजेडी के लिए प्रचार शुरू कर दिया। यह उनका राजनीतिक सफर का पहला कदम था, जब वे पिता लालू के चुनावी अभियान में सक्रिय हुए।
2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में राघोपुर सीट से डेब्यू करते हुए उन्होंने भाजपा के सतीश कुमार यादव को 22,733 वोटों से हराया। महागाथबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-जदयू) की लहर में वे जीते और उसी साल नवंबर में नीतीश कुमार सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। सड़क निर्माण, भवन निर्माण और पिछड़ा वर्ग विकास जैसे विभाग उनके पास रहे।
2017-2020: विपक्ष की कमान और चुनावी चुनौतियां
2017 में नीतीश कुमार के भाजपा से हाथ मिलाने पर महागाथबंधन टूट गया। तेजस्वी को उपमुख्यमंत्री पद से हटाया गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। जुलाई में वे बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता बने, एक पद जो उन्होंने 2022 तक संभाला। इस दौरान आरजेडी की कमान संभालते हुए उन्होंने पार्टी को मजबूत आधार दिया। 2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में उतरे। आरजेडी को 75 सीटें मिलीं, जो सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत (122) न मिलने से सरकार नहीं बना सके। राघोपुर से फिर जीत हासिल की, इस बार 38,174 वोटों के अंतर से। चुनावी हलफनामे में 11 आपराधिक मुकदमों का खुलासा किया, जिनमें भ्रष्टाचार और साजिश के आरोप शामिल थे।
2022-2024: उपमुख्यमंत्री की वापसी और गठबंधन की उलटफेर
2022 में एक बार फिर नीतीश कुमार के साथ गठबंधन हुआ। अगस्त में तेजस्वी दोबारा उपमुख्यमंत्री बने, इस बार स्वास्थ्य, सड़क निर्माण, शहरी विकास और ग्रामीण विकास विभाग संभाले। यह बिहार की सियासत में बड़ा मोड़ था, जहां युवा छवि ने उन्हें नई ऊंचाइयां दीं।
लेकिन जनवरी 2024 में नीतीश के भाजपा से हाथ मिलाने पर गठबंधन टूटा और तेजस्वी फिर विपक्ष के नेता बने। इस दौरान लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले और आईआरसीटीसी टेंडर मामले में सीबीआई-ईडी की जांच चली, जिसमें उनके परिवार पर रेलवे नौकरियों के बदले जमीन लेने के आरोप लगे। मार्च 2023 में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की। 2023 में ‘गुजराती गुंडे’ वाले बयान पर मानहानि का केस चला, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2024 में इसे रद्द कर दिया।
2025: बिहार चुनाव में कमान और राघोपुर की तीसरी जीत
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में तेजस्वी को महागाथबंधन का मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया गया, जिसमें मुकेश साहनी को उपमुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया। चुनावी रणनीति में युवा मुद्दों और विकास पर फोकस किया। 6 नवंबर को मतदान के बाद 14 नवंबर को आए नतीजों में राघोपुर से तीसरी बार जीत दर्ज की, इस बार भाजपा के सतीश कुमार को 14,532 वोटों से हराया। हालांकि गठबंधन बहुमत से चूका, लेकिन आरजेडी की सीटें मजबूत रहीं। यह जीत उनके बढ़ते वर्चस्व को दर्शाती है, खासकर यादव-मुस्लिम समीकरण पर।
तेजस्वी की यात्रा बिहार की जातिगत और गठबंधन राजनीति का आईना है। सबसे युवा उपमुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता के रूप में उनकी पहचान बनी। 2020 और 2021 में इंडियन एक्सप्रेस की ‘100 सबसे प्रभावशाली भारतीयों’ सूची में जगह मिली। भविष्य में उनकी भूमिका राज्य की सियासत को नई दिशा देगी।
